Mukhyamantri Laghu Udyog Protsahan Yojana (MLUPY) राजस्थान सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की एक महत्वपूर्ण ऋण आधारित योजना थी। इसका उद्देश्य राजस्थान में नए उद्योग स्थापित करने तथा पहले से संचालित उद्योगों के विस्तार, विविधीकरण और आधुनिकीकरण के लिए वित्तीय संस्थानों के माध्यम से ब्याज अनुदान युक्त ऋण उपलब्ध कराना था।
योजना के तहत विनिर्माण, सेवा और व्यापार क्षेत्र से जुड़े उद्यमों को वित्तीय सहायता देने का प्रावधान था।
हालांकि, वर्तमान समय में इस योजना की नई आवेदन प्रक्रिया बंद है, क्योंकि योजना को 31 जुलाई 2024 से बंद कर दिया गया था।
Mukhyamantri Laghu Udyog Protsahan Yojana की वर्तमान स्थिति 2026
यह इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण जानकारी है।
राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति, राजस्थान के रिकॉर्ड के अनुसार राजस्थान सरकार ने मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना (MLUPY) को 31 जुलाई 2024 से बंद कर दिया था।
बंद किए जाने के बाद पहले से लंबित आवेदनों के संबंध में बैंकों को निर्धारित समय सीमा में ऋण स्वीकृत और वितरित करने के निर्देश दिए गए थे।
इसलिए यदि आप 2026 में इस योजना के नाम से नया Online Apply करने की जानकारी खोज रहे हैं, तो ध्यान रखें कि नई आवेदन प्रक्रिया को चालू बताना सही नहीं होगा।
योजना कब शुरू हुई थी?
Mukhyamantri Laghu Udyog Protsahan Yojana को राजस्थान में 17 दिसंबर 2019 से लागू किया गया था।
इसका उद्देश्य राज्य में उद्यम स्थापित करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए कम लागत पर ऋण उपलब्ध कराना था।
योजना में व्यक्तिगत आवेदकों के साथ-साथ कुछ संस्थागत आवेदकों को भी पात्रता दी गई थी।
Mukhyamantri Laghu Udyog Protsahan Yojana में कितना ऋण मिलता था?
योजना के मूल प्रावधानों के अनुसार विनिर्माण, सेवा और व्यापार आधारित उद्यमों के लिए अधिकतम ₹10 करोड़ तक ऋण उपलब्ध कराने का प्रावधान था।
ऋण का उपयोग परियोजना की आवश्यकता के अनुसार विभिन्न कार्यों के लिए किया जा सकता था, जैसे:
- भूमि
- प्लांट एवं मशीनरी
- वर्कशेड/भवन
- फर्नीचर
- उपकरण
- कच्चा माल
- कार्यशील पूंजी
- व्यवसाय के विस्तार से संबंधित आवश्यकताएं
हालांकि, योजना में समय-समय पर संशोधन किए गए थे और अलग-अलग प्रकार के प्रोजेक्ट के लिए अलग सीमाएं लागू हो सकती थीं।
कितनी ब्याज सब्सिडी मिलती थी?
MLUPY के तहत ऋण राशि के आधार पर ब्याज अनुदान की तीन श्रेणियां थीं:
| अधिकतम ऋण राशि | ब्याज अनुदान |
|---|---|
| ₹25 लाख तक | 8% |
| ₹25 लाख से अधिक और ₹5 करोड़ तक | 6% |
| ₹5 करोड़ से अधिक और ₹10 करोड़ तक | 5% |
योजना के प्रावधानों के अनुसार ब्याज अनुदान की अधिकतम अवधि 5 वर्ष तक थी।
यदि बैंक का लागू ब्याज इससे कम होता था, तो योजना के प्रावधानों के अनुसार वास्तविक ब्याज दर के स्तर तक ही अनुदान दिया जा सकता था।
किन लोगों के लिए योजना बनाई गई थी?
योजना के मूल प्रावधानों में व्यक्तिगत आवेदकों के साथ-साथ कुछ संस्थागत आवेदकों को भी शामिल किया गया था।
इनमें शामिल थे:
- व्यक्तिगत उद्यमी
- स्वयं सहायता समूह
- सोसायटी
- Partnership Firm
- LLP Firm
- Company
व्यक्तिगत आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित थी।
संस्थागत आवेदकों के लिए संबंधित संस्था का नियमानुसार पंजीकृत होना आवश्यक था।
किन क्षेत्रों के लिए ऋण मिलता था?
योजना मुख्य रूप से तीन प्रमुख क्षेत्रों के उद्यमों के लिए थी:
1. Manufacturing
विनिर्माण से संबंधित उद्योगों के लिए ऋण का प्रावधान था।
2. Service
सेवा क्षेत्र में नए उद्यम या पात्र मौजूदा व्यवसाय के विस्तार के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध थी।
3. Trade
व्यापार आधारित पात्र गतिविधियों के लिए भी योजना के तहत ऋण का प्रावधान था।
नए और पुराने दोनों उद्योगों के लिए प्रावधान
योजना का उद्देश्य केवल नया बिजनेस शुरू करवाना नहीं था।
इसके अंतर्गत:
- नया उद्योग स्थापित करना
- मौजूदा उद्योग का विस्तार
- व्यवसाय का विविधीकरण
- उद्योग का आधुनिकीकरण
जैसी गतिविधियों के लिए भी ऋण उपलब्ध कराने का प्रावधान था।
क्या बिना Collateral के लोन मिलता था?
योजना के मूल दिशा-निर्देशों में RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार ₹10 लाख तक के ऋण पर Collateral Security नहीं मांगने का प्रावधान था।
कुछ मामलों में ऋण को Credit Guarantee Trust Fund for Micro and Small Enterprises (CGTMSE) जैसी व्यवस्था से जोड़ने का भी प्रावधान था।
CGTMSE से संबंधित शुल्क का वहन लाभार्थी द्वारा किया जाना था, जैसा लागू नियमों में निर्धारित था।
ऋण की अवधि कितनी थी?
योजना के तहत ब्याज अनुदान की अधिकतम अवधि 5 वर्ष थी।
बैंक द्वारा स्वीकृत ऋण की कुल अवधि 5 वर्ष से अधिक हो सकती थी, लेकिन योजना के तहत ब्याज अनुदान अधिकतम निर्धारित अवधि तक ही उपलब्ध था।
कुछ मामलों में बैंक द्वारा अधिकतम 6 महीने तक की repayment holiday/moratorium की सुविधा परियोजना की प्रकृति और repayment capacity के आधार पर दी जा सकती थी।
कौन-सी गतिविधियां योजना से बाहर थीं?
योजना के मूल दिशा-निर्देशों में कुछ गतिविधियों को अपात्र रखा गया था।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:
- मांस, मदिरा और मादक पदार्थों से बने उत्पादों का निर्माण/विक्रय
- विस्फोटक पदार्थ
- निर्धारित सीमा से अधिक कीमत वाले परिवहन वाहन
- गैर-पुनर्चक्रणीय पॉलीथीन
- पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कुछ प्लास्टिक उत्पाद
- सरकार द्वारा प्रतिबंधित उत्पाद या गतिविधियां
- कुछ कृषि एवं संबद्ध गतिविधियां
इसलिए केवल व्यवसाय शुरू करने की इच्छा होना पर्याप्त नहीं था; प्रस्तावित गतिविधि का योजना के नियमों के अंतर्गत पात्र होना जरूरी था।
Mukhyamantri Laghu Udyog Protsahan Yojana में आवेदन कैसे किया जाता था?
योजना के संचालन के समय आवेदन प्रक्रिया Online रखी गई थी।
आवेदन के लिए राजस्थान सरकार के संबंधित पोर्टल का उपयोग किया जाता था।
आवेदन प्रक्रिया में सामान्यतः:
- Online application भरना
- व्यक्तिगत/व्यावसायिक जानकारी दर्ज करना
- Project की जानकारी देना
- आवश्यक दस्तावेज अपलोड करना
- Project Report प्रस्तुत करना
- आवेदन की जांच
- संबंधित बैंक/वित्तीय संस्था को आवेदन भेजना
- बैंक द्वारा Credit Assessment
- ऋण स्वीकृति
- ऋण वितरण
जैसे चरण शामिल थे।
₹10 लाख तक के आवेदन की प्रक्रिया
योजना के पुराने दिशानिर्देशों के अनुसार ₹10 लाख तक के ऋण आवेदन जिला उद्योग केंद्र स्तर पर जांच के बाद आगे बढ़ाए जा सकते थे।
₹10 लाख से अधिक के आवेदन के लिए जिला स्तरीय Task Force Committee द्वारा जांच और मूल्यांकन की व्यवस्था थी।
समिति परियोजना की व्यवहार्यता, बाजार की संभावना, आवेदक की योग्यता/अनुभव तथा ऋण चुकाने की क्षमता जैसे पहलुओं पर विचार कर सकती थी।
आवेदन में Project Report क्यों जरूरी थी?
Business Loan के लिए Project Report एक महत्वपूर्ण दस्तावेज था।
इसमें सामान्यतः निम्न जानकारी शामिल होती थी:
- व्यवसाय का प्रकार
- कुल परियोजना लागत
- मशीनरी की लागत
- भवन/वर्कशेड की आवश्यकता
- कच्चे माल की आवश्यकता
- कार्यशील पूंजी
- संभावित उत्पादन
- बिक्री का अनुमान
- रोजगार की संभावना
- अनुमानित आय
- बैंक से आवश्यक ऋण
एक मजबूत और व्यावहारिक Project Report बैंक द्वारा परियोजना के मूल्यांकन में उपयोगी होती है।
योजना के तहत ऋण किसके माध्यम से मिलता था?
योजना में विभिन्न वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराने का प्रावधान था।
इनमें शामिल संस्थाएं थीं:
- राष्ट्रीयकृत वाणिज्यिक बैंक
- RBI द्वारा अधिकृत निजी क्षेत्र के अनुसूचित बैंक
- Scheduled Small Finance Banks
- Regional Rural Banks
- Rajasthan Financial Corporation (RFC)
- SIDBI
योजना के पुराने प्रावधानों में राजस्थान राज्य में स्थित वित्तीय संस्थाओं के माध्यम से ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था थी।
Mukhyamantri Laghu Udyog Protsahan Yojana योजना का मुख्य उद्देश्य
मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना के प्रमुख उद्देश्य थे:
- नए उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा देना
- मौजूदा उद्योगों का विस्तार करना
- उद्योगों का आधुनिकीकरण
- स्वरोजगार को बढ़ावा देना
- रोजगार के नए अवसर पैदा करना
- उद्यमियों को कम ब्याज लागत पर ऋण उपलब्ध कराना
- राजस्थान में MSME क्षेत्र को मजबूत करना
Mukhyamantri Laghu Udyog Protsahan Yojana योजना से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े
राजस्थान सरकार की आर्थिक समीक्षा 2024-25 के अनुसार योजना के अंतर्गत ₹10 करोड़ तक के ऋण का प्रावधान बताया गया था।
उसी समीक्षा में दिसंबर 2024 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार योजना के तहत ₹1,103.51 करोड़ के ऋण 3,616 उद्यमियों को वितरित किए जाने और ₹172.92 करोड़ ब्याज अनुदान दिए जाने की जानकारी दी गई थी।
ये आंकड़े योजना के संचालन काल से संबंधित हैं और इन्हें 2026 की नई आवेदन उपलब्धता नहीं समझना चाहिए।
क्या 2026 में Mukhyamantri Laghu Udyog Protsahan Yojana में Online Apply कर सकते हैं?
नहीं, नई आवेदन प्रक्रिया को वर्तमान 2026 योजना के रूप में नहीं बताया जाना चाहिए।
राजस्थान की राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के रिकॉर्ड में स्पष्ट है कि MLUPY को 31 जुलाई 2024 से बंद कर दिया गया था।
इसके बाद पुराने लंबित मामलों के निस्तारण और पहले से स्वीकृत ऋण के वितरण के लिए अलग समय-सीमाएं दी गई थीं।
इसलिए इंटरनेट पर यदि कोई वेबसाइट अभी भी “MLUPY 2026 Online Apply” के नाम से नई आवेदन प्रक्रिया बता रही है, तो उसे आधिकारिक रिकॉर्ड से जरूर जांचें।
Mukhyamantri Laghu Udyog Protsahan Yojana बंद होने के बाद क्या करें?
यदि आपका उद्देश्य राजस्थान में नया व्यवसाय शुरू करना है, तो 2026 में आपको वर्तमान में संचालित स्वरोजगार/उद्यमिता योजनाओं की पात्रता और लाभ देखना चाहिए।
राजस्थान सरकार द्वारा समय-समय पर युवाओं, MSME और उद्यमियों के लिए नई योजनाएं शुरू या संशोधित की जाती हैं।
इसलिए पुराने MLUPY आवेदन लिंक पर निर्भर रहने के बजाय वर्तमान उद्योग विभाग की योजनाओं को देखना अधिक उचित है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. Mukhyamantri Laghu Udyog Protsahan Yojana क्या थी?
यह राजस्थान सरकार की ब्याज अनुदान आधारित ऋण योजना थी, जिसका उद्देश्य नए उद्यम स्थापित करने तथा मौजूदा उद्यमों के विस्तार, विविधीकरण और आधुनिकीकरण के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना था।
2. MLUPY का पूरा नाम क्या है?
MLUPY का पूरा नाम Mukhyamantri Laghu Udyog Protsahan Yojana है।
3. MLUPY में कितना लोन मिलता था?
योजना के मूल प्रावधानों में अधिकतम ₹10 करोड़ तक ऋण का प्रावधान था, हालांकि विभिन्न संशोधनों के कारण कुछ प्रकार के प्रोजेक्ट/ऋण पर अलग सीमाएं लागू हुई थीं।
4. MLUPY में कितनी ब्याज सब्सिडी मिलती थी?
₹25 लाख तक के ऋण पर 8%, ₹25 लाख से अधिक और ₹5 करोड़ तक 6%, तथा ₹5 करोड़ से अधिक और ₹10 करोड़ तक 5% ब्याज अनुदान का प्रावधान था।
5. क्या MLUPY अभी चालू है?
नहीं। उपलब्ध आधिकारिक बैंकर्स समिति रिकॉर्ड के अनुसार योजना 31 जुलाई 2024 से बंद कर दी गई थी।
6. क्या 2026 में MLUPY का नया Online Form भर सकते हैं?
नई आवेदन प्रक्रिया को 2026 में चालू योजना के रूप में नहीं बताया जाना चाहिए। पुराने लंबित मामलों के लिए अलग निस्तारण प्रक्रिया रही थी।
7. MLUPY किस राज्य की योजना थी?
यह राजस्थान सरकार की योजना थी।
8. क्या महिला भी MLUPY में आवेदन कर सकती थीं?
हां। योजना में व्यक्तिगत आवेदकों के लिए लिंग आधारित प्रतिबंध नहीं था। पात्रता पूरी करने वाली महिला भी आवेदन कर सकती थी, जब योजना चालू थी।
9. क्या नए बिजनेस के लिए योजना थी?
हां। योजना का उद्देश्य नए उद्यमों की स्थापना के साथ मौजूदा उद्यमों के विस्तार, विविधीकरण और आधुनिकीकरण को सहायता देना था।
10. अब राजस्थान में बिजनेस लोन के लिए क्या करें?
2026 में MLUPY को नई आवेदन योजना मानने के बजाय राजस्थान सरकार के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की वर्तमान योजनाओं और वित्तीय सहायता कार्यक्रमों की जानकारी देखनी चाहिए।
Important Links
MLUPY Official Portal: मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना का राजस्थान सरकार पोर्टल
Rajasthan Industries Department: उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, राजस्थान सरका
Rajasthan SSO: Online Government Services Portal
District Industries Centre: अपने जिले के जिला उद्योग केंद्र से वर्तमान उद्यमिता योजनाओं की जानकारी प्राप्त करें।
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